Friday 20 February 2009

दिल्ली की मेयर सुश्री आरती मेहरा ने दो पुस्तकें लोकार्पित कीं

१०१ कवयित्रिओं के काव्य-संग्रह "हिन्दी की चर्चित कवयित्रियाँ 'पुस्तक का लोकार्पण करते हुए दिल्ली की मेयर सुश्री आरती मेहरा .(बाएं से ) अशोक लव ,राजेंद्र गौतम, आरती मेहरा, डॉ शेरजंग गर्ग, सुरेश यादव, अशोक वर्मा,रमा पाण्डेय .(दायें खड़े ) संपादक- आर के पंकज
. आर के पंकज द्वारा संपादित 'हिन्दी की चर्चित कवयित्रियाँ ' और उनके काव्य-संग्रह ''जीना ख़ुद में एक कला है' का १५..०९ को दिल्ली की मेयर सुश्री आरती मेहरा ने त्रिवेणी सभागार ,नई दिल्लीमें लोकार्पण किया.कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ शेरजंग गर्ग ने की। विशिष्ट-अतिथियों-- अशोक लव,डॉ राजेंद्र गौतम,सुरेश यादव, रमा पाण्डेय ने पुस्तक पर समीक्षात्मक विचार प्रकट किए
दीप प्रज्वलित करते हुए विशिष्ट -अतिथि श्री अशोक लव
आर के पंकज का स्वागत
आयोजन के प्रेरक वरिष्ट -साहित्यकार श्री अशोक वर्मा का स्वागत
विशिष्ट-अतिथि श्री अशोक लव का स्वागत करते हुए विनोद बंसल
'जीना ख़ुद में एक कला है' आर के पंकज का काव्य-संग्रह लोकार्पित करते हुए सुश्री आरती मेहरा
मंच पर-डॉ हरीश अरोड़ा आर के पंकज, अशोक लव ,डॉ राजेंद्र गौतम, रमा पाण्डेय, डॉ शेरजंग गर्ग, अशोक वर्मा,सुमीत भार्गव

डॉ हरीश अरोड़ा, आर के पंकज, अशोक लव
दिल्ली की मेयर सुश्री आरती मेहरा पुस्तकों पर बोलते हुए
डॉ हरीश अरोड़ा, आर के पंकज, अशोक लव ,डॉ राजेंद्र गौतम
श्रीमती मीनाक्षी और पति श्री आर के पंकज लोकार्पण के पश्चात्
अशोक लव ,डॉ शेरजंग गर्ग ,अशोक वर्मा और प्रकाशक परिवार
विशिष्ट-अतिथि रमा पाण्डेय

मीनाक्षी मालिक धन्यवाद करते हुए

Tuesday 3 February 2009

*समीक्षा --अशोक लव की संघर्षशील लड़कियों के लिए कविताएँ / ओम सपरा



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मित्र संगम पत्रिका ,संपादक- प्रेम वोहरा ,पुरानी गुप्ता कालोनी ,दिल्ली-११००९
फ़ोन -०११-२७२२६२६५ (मो) ९८६८८७०१२१ अंक - फरवरी-२००९
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यह सच है की आज तमाम आधुनिकता के बावजूद भी हमारा समाज लड़कियों के मामले में सदियों पूर्व की मानसिकता में जी रहा है। अन्यथा भ्रूण हत्या ,दहेज तथा महिलाओं पर राह चलते लूटपाट व अत्याचार किस सोच के प्रतीक हैं ?डॉ व्रज किशोर पाठक ने सही लिखा है - ' अशोक लव शेक्सपीयर की तरह गद्य को मुक्त छंद के कविता शिल्प में लिखते हैं और अकविता से अपनी दूरी रखते हुए अनुभूति, विचार को गहराई में ढालते हैं। चित्र,बिम्ब,मिथक, नए विशेषण ,नए उपमान गढ़ते रहते हैं।
प्रोफ़ेसर रूप देवगुण ने कहा है - पुरूष होकर भी अशोक लव ने इन कविताओं के माध्यम से पुरुषों की मानसिकता पर जो प्रहार किया है, वह प्रशंसनीय है। वस्तुतः कवि सामाजिक सरोकारों से सीधे जुड़े है । वह समय की धडकनों का चितेरा होता है।'
डॉ अशोक लव न केवल एक अच्छे लघुकथाकार हैं अपितु एक संवेदनशील कवि भी हैं, ऐसा उनके इस काव्य-संग्रह के कविताओं को पढ़कर स्पष्ट हो जाता है। अशोक लव ज़मीन से जुड़े कवि हैं । उनकी कविताओं में गुलाब के फूलों सी ताजगी है, साथ ही उनके विचारों में सागर सी गहराई भी झलकती है। कविता के साथ-साथ गद्य पर भी आपकी लेखनी अधिकारपूर्वक चलती रहती है। उनकी कविताओं में संवेदनाएं तो हैं ही , व्यवस्था के परिवर्तन एवं शोधन के लिए निरंतर चलने वाला विचार-मंथन व आक्रोश का स्वर भी है।
पत्नी श्रीमती नरेशबाला लव एवं पुत्रियों- ऋचा ,पल्लवी और पारुल के नाम उनकी ये कविताएँ उन सब लड़कियों को समर्पित हैं जो आसमान को छूना चाहती हैं।
इस संग्रह में अधिकतर कविताएँ सुंदर व प्रभावशाली हैं पर - ' सदाबहार बेटियाँ, करतारो सुर्खियाँ बनाती रहेंगी , बदलते आँगन , छूटी गलियों की गंध, चक्रव्यूहों के मध्य, गरम मोम, कविता सूरज है, बदलता मौसम और तोता - मैना , घायल हवा ,अँधा-बहरा शहर , मरा गया एक ख़ास,गिलहरियाँ, उड़- उड़ जाते पक्षी ,वसंत का मेला, बगल में बैठी मृत्यु , लहरों के कामना -दीप, यूँ निकला सूरज ' आदि कुछ उल्लेखनीय कविताएँ हैं ।
आवरण सुंदर बन पड़ा है। संग्रह पठनीय है तथा मित्रों को उपहार में देने योग्य है।
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*समीक्षक - ओम सपरा , एन-२२, मुकर्जी नगर,दिल्ली ११०००९
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कवि- डॉ अशोक लव ,३६३-सूर्य अपार्टमेन्ट, पलट-१४,सेक्टर- , द्वारका,नई दिल्ली-११००७५ ,प्रकाशक-सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल-१३६०२७,पृष्ठ -११२,मूल्य-१०० रु
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