Thursday 18 October 2012

वह और भेड़ें


वह सब्ज़ बाग दिखाकर झुंड में से कुछ भेड़ों को अपने साथ ले गया था. हरी-हरी घास, पीने के लिए झरनों का पानी ...उसने कितने-कितने स्वप्न दिखाए ! भेड़ें वर्षों से झुंड में थीं.लालच में आकर अपनों को छोड़कर चली गई. वह उन्हें अपने साथ जंगल में बहुत दूर ले गया. खूब खिलाया -पिलाया.लालची भेड़ों को लगा वे स्वर्ग में आ गई हैं.उन्होंने पीछे रह गई भेड़ों को मूर्ख कहा और भी न जाने क्या-क्या कहा.भेड़ें उसकी जय-जयकार करती रहीं.एक दिन वह उन्हें छोड़कर न जाने कहाँ चला गया. अब भेड़ें जंगल में भटकती फिर रही हैं.असमंजस में हैं.क्या करें? कहाँ जाएँ ?अपने झुंड में कैसे लौटें? 'वह' स्वार्थी भेड़ों का तमाशा देख रहा है. कुछ भेड़ें पागल होकर पेड़ों से सिर टकरा रहीं हैं. उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. अब उनका क्या होगा,किसी को नहीं पता !

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