Thursday, 4 December, 2008

बन्दूक थामे हाथ / * अशोक लव






जब हाथों में बन्दूक आ जाती है
तब नहीं सुनाई देतीं
गाती चिड़ियाओं की मधुर ध्वनि
उड़ते पक्षियों के पंखों का शोर
मौत को पसारने आए
भूल जाते हैं
अपने इन्सान होने का वजूद।
यही बंदूकें कर देती हैं
उन्हें भी छलनी - छलनी
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*२६.११.२००८ मुंबई में आतंकवादी घटना
@सर्वाधिकार सुरक्षित

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