Sunday 22 November 2009

आभा खेतरपाल : संघर्षमय जीवन / अशोक लव


अशोक लव और आभा खेतरपाल

आभा खेतरपाल संघर्षमय जीवन की पर्याय हैं. दृढ़ संकल्प-शक्ति और जीवन को पूर्णतया जानने और जीने की ललक ने उनकी शारीरिक अक्षमता को आड़े नहीं आने दिया. तीन वर्ष की आयु में पोलियो ने उनकी देह को असामान्य बना दिया. अन्य बालिकाओं के सामान वे स्कूल न जा सकीं. खेल-कूद न सकीं. अध्ययन की लगन थी. घर में ही पढ़ती रहीं. बीमारी का इलाज चलता रहा. ऑपरेशन हुए. रीढ़ की हड्डी में छड़ डाली गई ताकि वे कमर सीधी रख सकें. लम्बी कष्टदायक प्रक्रियाएँ चलती रहीं और आभा उन्हें आभा खेतरपाल के पिता जी अशोक लव और आभा खेतरपाल
झेलती रहीं. पीड़ाओं को झेलते-झेलते वे और दृढ़ होती चली गईं.
वे हाथ से लिख नहीं नहीं पाती थीं. हथेली का ऑपरेशन करके उँगलियों को चलाने लायक किया गया. और आभा ने नौवीं कक्षा में स्कूल जाना शुरू किया. माता-पिता दोनों शिक्षक थे. आभा के लिए वे प्रेरणास्रोत बने. ' कैम्ब्रिज फौंडेशन स्कूल ' ( राजौरी गार्डन, नई दिल्ली ) की अध्यक्षा श्रीमती शीला वर्मा ने उन्हें दाखिल कर लिया. आभा कहती हैं , ' मैं आजीवन उनकी कृतज्ञ रहूँगी. वे न होतीं तो मेरे लिए शिक्षा के द्वार कभी न खुलते.'
इसके पश्चात् तो आभा के सामने एक नई दुनिया थी. उस दुनिया में पुस्तकें ही पुस्तकें थीं और नई-नई उपाधियाँ ग्रहण करने की लगन थी. आकाश को छूने के सपने थे. इन्हीं को पूरा करने के लिए उन्होंने बारहवीं के पश्चात् बी.ए.(दिल्ली विश्वविद्यालय),एम.ए.(इकोनोमिक्,पंजाब विश्वविद्यालय) ,एम.ए.(इंग्लिश,अन्नामलाविश्वविद्यालय), एम.एस.सी.(सायकोथेरपी एंड काउंसलिंग,मुंबई) से की.
वे यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ' कंप्यूटर सौफ्टवेयर एप्लीकेशंज़ ' में पी.जी. डिप्लोमा किया.
आश्चर्य होता है, व्हील-चेयर का सहारा और उन्होंने वह सब कर दिखाया जो सामान्य व्यक्ति नहीं कर पाता. हमारे आस-पास ही ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका जीवन प्रेरणा प्रदान कर सकता है. आभा खेतरपाल ऐसा ही व्यक्तित्व है.आरिफ जमाल (संपादक-न्यू ऑब्ज़र्वर पोस्ट)
अध्ययन के साथ उन्होंने अध्यापन आरंभ कर दिया. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता आवश्यक थी. पंद्रह वर्षों से अध्यापन करते हुए उन्होंने अपने विद्यार्थिओं का मार्गदर्शन किया. कहीं जाकर पढ़ाना संभव न था. वे घर पर ही ट्यूशन पढ़ाती हैं. ऑनलाइन करियर-काउंसलिंग भी करती हैं.
आभा सशक्त कवयित्री हैं. वे हिन्दी में लेखन करती हैं. स्वयं साहित्य से संबद्ध तो हैं ही , इसके साथ वे साहित्यप्रेमियों को लेखन के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं. युवा साहित्यकारों में लेखन की रुचि जाग्रत करना उनका लक्ष्य है.
उन्होंने ऑरकुट पर 'सृजन का सहयोग' ' कम्युनिटी' का आरंभ जनवरी २००८ में किया था. आज इसके ३६० सदस्य हैं. इसमें अनेक वरिष्ठ साहित्यकार भी हैं. यह उनके कुशल संयोजन का प्रमाण है. वे इसके लिए और बहुत कुछ करना चाहती हैं. वे श्री वीनू की आभारी हैं,जिन्होंने इस प्रयास में उनका साथ ही नहीं दिया अपितु प्रेरणा भी दी.
आभा खेतरपाल माता-पिता की सबसे अधिक आभारी हैं जिन्होंने इन शिखरों तक पहुँचाने के लिए उनकी वर्षों तक अनथक सेवा की.
संघर्षों में मानसिक संतुलन किस प्रकार बनाया जाता है --आभा इसकी जीवंत प्रमाण हैं. देह उनके मानसिक और बौद्धिक विकास में बाधक नहीं बनी. कविता उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति बनी. जीवन के इकतालीस वर्ष पार कर चुकी हैं और वे पल-पल जीवन्तता के साथ जीना चाहती हैं. दृढ़ निश्चय और लक्ष्यों को प्राप्त करने के संकल्प उनके प्रत्येक स्वप्न साकार करेंगे. उनका जीवन दूसरों के लिए प्रेरक बनेगा.

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