Sunday 7 September 2008

कंचन सिंह चौहान : संवेदनशील कवयित्री

ब्लॉग की दुनिया में मेरा प्रवेश अचानक ही हो गया। अचानक " हृदय गवाक्ष " ब्लॉग में अपनी कविता "अधिकार" को पढ़कर चौंक गया। पता चला नासिरा शर्मा जी ने अपनी पुस्तक में इसे उद्धृत किया था ,जिसे कंचन सिंह चौहान ने अपने ब्लॉग में चर्चित किया था। सुखद अनुभव हुआ। अपनी प्रतिक्रिया लिखी ओर एक दिन मेल मिली। यहाँ से आरम्भ हुआ इस कर्मठ , संघर्ष शीला कवयित्री से सम्पर्क का सिलसिला। छोटी हैं पर ब्लॉग के संसार में लाने की प्रेरक हैं। "शिखरों से आगे " मेरा चर्चित उपन्यास है , जिस पर तीन एम् फिल हुई हैं , उसी के आधार पर ब्लॉग का नामकरण करने का श्रेय भी कंचन जी को ही जाता है। ब्लॉग बनने का कार्य भी उन्होंने ही किया। *.......

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