Monday 29 September 2008

गलतफहमी में जीते लोग

कुछ लोग जीते हैं
गलतफहमी में
उन्हें यही लगता है कि
बस वही हैं
और बस वही हैं ,
सूर्य -से -
केन्द्र -बिंदु बने हैं ,
घूमते हैं ग्रहों -से लोग
उनके चारों ओर।
प्रकाश- पुंज
सूर्य - सा कहाँ है उनके पास !
उन्हें बस गलतफहमी है कि वे
सूर्य हैं
क्योंकि उनके पास सत्ता है।
चाटुकारों के चरण-चुम्बनों ने
उनमें रावणत्व जगा दिया है,
वे नहीं जानते कि रावण कहाँ रहा
जो वे रहेंगे ।
उन्हें गलतफहमी में जीते देखकर
मुस्कराते हैं
वास्तविकता को जानने वाले।
काश!
वे उतार पाते सूर्य - सा प्रकाश- पुंज
मन में
तब हो जाते उदार सूर्य- से।


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