- See the movie "THE COVE" and save Japanese Dolphins. A noble cause.
- Mohyal youth Camp is from 2nd to 4th October at Dehradoon. Waiting for all of you.
- Matter sent to press for September issue of Mohyal Mitter.
- " Jinnah - India, Partition, Independence " - Ghost of Jinnah is very strong Mr Jaswant! He got you expelled.
- chunav kya hare apne hee ghar ke tinke-tinke bikherne men lag gaye.no ideologies, no coomittment, only sattaa, kursee. vah rajneeti!
- write a book on controversial topics, give interviews on tv , forget all ideologies, your book will sell like hot cake .Maujan hee Maujan!
- "If you can't sing just recite the lines of a song / poem and see the effect."-Ashok Lav
- Actor SRK was detained at US airport. They followed their rules. If someone don't like , don't go there. Indian TV channels are cashing it.
Tuesday, 25 August 2009
माई ट्वीट्स / अशोक लव
पता न चला / अशोक लव
इतनी खामोशी से कदम रखे , पता ही न चला ,
ज़िंदगी कब आगोश में ले ली , पता ही न चला ।
ज़िंदगी कब आगोश में ले ली , पता ही न चला ।
Friday, 14 August 2009
' वुमेन ऑन टॉप ' हिन्दी पत्रिका में अशोक लव

अशोक लव के कविता संग्रह " लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान " की कविताओं से प्रभावित होकर ' वुमेन ऑन टॉप ' पत्रिका में इसी नाम से स्थायी स्तम्भ जून अंक से आरंभ किया गया है। इसमें " लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान " कविता प्रकाशित की गई है ।* पुस्तक की भूमिका की पंक्तियों के साथ टिप्पणी प्रकाशित की गई है - "आज लड़कियाँ पढ़ -लिखकर उन सब क्षेत्रों में कार्य करने लगी हैं जो कल तक पुरुषों के लिए ही सीमित थे। व्यावसायिक क्षेत्रों में वे जहाँ-जहाँ कार्य कर रही हैं , पुरुषों से अधिक सफलता प्राप्त कर रही हैं। नारी के प्रति पुरुषों के द्वारा निर्धारित मापदंड झूठे सिद्ध हो रहे हैं । स्कूलों में पढ़ रही लड़कियों के परीक्षा परिणाम लड़कों से अधिक श्रेष्ठ आ रहे हैं । "
इन्हीं लड़कियों को और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हम एक नया कॉलम शुरू कर रहे हैं --लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान। इस कॉलम में प्रस्तुत कविता प्रसिद्ध साहित्यकार श्री अशोक लव जी की है और यह केवल एक कविता ही नहीं है वरन यह एक शंखनाद है , उस पुरूष समाज को जो लड़कियों के प्रति अपनी संकीर्ण सोच रखता है। यह कविता डंके की चोट पर कह रही है , पुरूष समाज को की वह अपनी मानसिकता को बदले और लड़कियों को जहाँ तक हो प्रोत्साहित करे।
जून अंक में रश्मि प्रभा द्वारा इस पुस्तक की समीक्षा भी प्रकाशित की गई है। इसी अंक से पत्रिका के तीन पृष्ठों का स्तंभ शुरू कर दिया गया है।
जुलाई अंक में इसी पुस्तक से " सदाबहार बेटियाँ " कविता और अगस्त अंक में " उत्तरों को तलाशती लड़की " कविता प्रकाशित हुई है।
डॉ (श्रीमती ) कमल अग्रवाल द्वारा संपादित यह बहुरंगी आर्ट पेपर पर छपने वाली पत्रिका हर परिवार के लिए अनिवार्य लगती है। सामाजिक सोच को अभिव्यक्त करने वाली ऐसी साफ़-सुथरी व्यावसायिक पत्रिकाएँ कम हैं। पता है -
ऐ - ९६, सेक्टर-६५, नॉएडा-२०१३०१,फ़ोन-०१२०-४२७९५०१-०३
* लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान कविता इसी ब्लॉग में है।
-- सर्वेश तिवारी
Friday, 7 August 2009
Thursday, 6 August 2009
टूटे सिलसिले / अशोक लव
Thursday, 30 July 2009
Sunday, 26 July 2009
सिरसा की महादेवी " रक्षा शर्मा कमल " को श्रद्धांजलि
सिरसा ( हरियाणा ) से वरिष्ठ साहित्यकार और हरियाणा हिन्दी साहित्य सम्मलेन के अध्यक्ष प्रोफेसर रूप देवगुण का फ़ोन कल ( २५ जुलाई ) को प्रातः आया । वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती रक्षा शर्मा कमल के निधन का दुखद समाचार देते हुए उनका कंठ अवरुद्ध था। वे उनकी अंत्येष्ठी में शामिल होने जा रहे थे। समाचार सुनते ही मन भर आया।
रक्षा शर्मा कमल जी से पहली भेंट सन् १९८५ में हुई थी। साहित्यिक कार्यक्रम में मुख्य - अतिथि के रूप में हम गए थे। सभी अतिथि साहित्यकारों को उन्होंने अपने निवास पर भोजन कराया था। इसके पश्चात् जब-जब सिरसा गए भोजन उनके यहाँ ही किया। बड़ी बहन-सा स्नेह बरसाती रक्षा जी सबका ध्यान रखती थीं ।
दिल्ली में उनके भाई रहते हैं। जब दिल्ली आतीं तो फ़ोन करतीं। उनसे मिलने उनके भाईसाहब के निवास पर जाते। साहित्य और पुस्तक प्रकशन पर चर्चा होती। वे मेरे निवास पर आती। बड़ी बहन की तरह मिठाई लेकर आतीं।
सन् १९९२ में उनकी पुस्तक " रक्षा सूक्ति कोश " प्रकाशित हुई । इसकी भूमिका हमने लिखी थी।
उनका जन्म १६ मार्च १९३६ को पटियाला में हुआ था। उनके पति स्वर्गीय श्री केशव कमल शर्मा शास्त्री जी नेत्रहीन थे.
रक्षा शर्मा कमल जी से पहली भेंट सन् १९८५ में हुई थी। साहित्यिक कार्यक्रम में मुख्य - अतिथि के रूप में हम गए थे। सभी अतिथि साहित्यकारों को उन्होंने अपने निवास पर भोजन कराया था। इसके पश्चात् जब-जब सिरसा गए भोजन उनके यहाँ ही किया। बड़ी बहन-सा स्नेह बरसाती रक्षा जी सबका ध्यान रखती थीं ।
दिल्ली में उनके भाई रहते हैं। जब दिल्ली आतीं तो फ़ोन करतीं। उनसे मिलने उनके भाईसाहब के निवास पर जाते। साहित्य और पुस्तक प्रकशन पर चर्चा होती। वे मेरे निवास पर आती। बड़ी बहन की तरह मिठाई लेकर आतीं।
सन् १९९२ में उनकी पुस्तक " रक्षा सूक्ति कोश " प्रकाशित हुई । इसकी भूमिका हमने लिखी थी।
उनका जन्म १६ मार्च १९३६ को पटियाला में हुआ था। उनके पति स्वर्गीय श्री केशव कमल शर्मा शास्त्री जी नेत्रहीन थे.
Friday, 3 July 2009
Monday, 29 June 2009
पॉप किंग को श्रद्धांजलि / अशोक लव
पॉप म्युज़िक किंग मायकल जैकसन का निधन २५ जून को लॉस एंजेल्स में हुआ था । वे विश्व भर में अपने गीत और संगीत के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव देखे। परिवार की टूटन को देखा। मुकद्दमों में फंसे रहे। ऋण के बोझ तले दबे रहे। मृत्यु से पूर्व तक विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। फिर भी उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई। अमेरिका के टी वी चैनल दिन-रात उनके जीवन के विभिन्न पक्षों पर
चर्चाएँ कर रहे हैं । उनकी मृत्यु के कारणों पर विश्व भर के टी वी चैनल बहस कर रहे हैं। पश्चिमी संगीत में क्रांति लाने वाले इस महान कलाकार के प्रशंसक दुनिया के कोने- कोने में हैं। व्यक्तिगत रूप से उनकी ज़िंदगी चाहे जैसी रही हो , संगीत के क्षेत्र में वे सचमुच के "किंग " थे।
हमने लॉस एंजेल्स जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। ' कोडक थियेटर ' के निकट देश-विदेश से आए उनके प्रशंसक उनके ' स्टार ' पर पुष्प अर्पित कर रहे थे। लम्बी लाइन लगी हुई थी। टी वी कैमरे लगे हुए थे। कुछ प्रशंसकों ने उनका रूप धारण किया हुआ था। हमने उन्हें अपनी , अपने परिवार और कला जगत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।
*अशोक लव
२८.६.२००९
नीले-सफ़ेद फूल / अशोक लव
अब पूरी तरह खिल गए हैं ।
कुछ समय पूर्व तक इनका अस्तित्व नहीं था .
प्रतीक्षा थी
इन फूलों के खिलने की
एक -एक कर कितने दिन बीत गए
और अब
ये अपना सौन्दर्य बिखेरने लगे हैं.
क्या विडंबना है !
अब ये खिल गए हैं
और हमीं इन्हें देखने के लिए नहीं रहेंगे।
कितने-कितने स्वप्न सजाते हैं हम
और कैसे स्वप्न भंग होते चले जाते हैं
बस एक टीस टूटे काँच-सी
काटती रहती है हर पल ।
इन नीले - सफ़ेद फूलों को
कहाँ स्मरण रहेगा -
किसी ने
उनके आगमन की प्रतीक्षा में
ऑंखें बिछा रखी थीं.
उनके संग जीने के
कितने-कितने स्वप्न सजा रखे थे !
कौन बदल सकता है
इन कटु सत्यों को ?
न चाहकर भी
जीना पड़ता इन स्थितियों को
और पल-पल टूटे काँच की कटन को
सहते जाना पड़ता है.
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
*थाउज़ैंड ओ़क्स , कैलीफोर्निया ,२८ जून २००९
*सर्वाधिकार सुरक्षित
Saturday, 27 June 2009
कठपुतली हो जाना / अशोक लव
कितना कठिन होता है
अपने अस्तित्व को खो देना
मात्र कठपुतली बन जाना ।
डोर खिंचते ही
उठना -बैठना
चलना -फिरना
घूमना - झूमना
हँसना-रोना ।
नहीं मर पातीं कठपुतलियाँ
अपनी इच्छा से
डोर खिंचते ही
वे फिर संकेतों पर जीने लगती हैं ।
'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
*१३.६.०९ , कैलीफोर्निया
* सर्वाधिकार सुरक्षित
Monday, 22 June 2009
सागर-पक्षी / अशोक लव
सागर की लहरों को
छोड़कर आ गया
सागर-पक्षी
करने बातें
मन की ।
विशाल पंखों को समेट
आकर बैठ गया मौन
न उसने कुछ कहा
न मैंने ।
हमने कर ली बातें
कुछ ही पलों में ।
बहुत बार
कहने के लिए
शब्दों की आवश्यकता नहीं पड़ती ।
'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
*सैंटा बारबरा , प्रशांत महासागर समुद्र - तट , 19 जून 2009
Thursday, 11 June 2009
एकांत में अहसास / अशोक लव
प्रकृति के आँचल में आते ही
न चिंताएँ
न तनाव
समुद्र की उठती -गिरती
तट तक आकर लौट जाती लहरें
पाँवों का स्पर्श कर , जाती लहरें
दूर तक केवल जल ही जल
दूर तक केवल लहरें ही लहरें
न माया न मोह
न छल न कपट
न काम न क्रोध
न ईर्ष्या न द्वेष
न मृगतृषनाएँ
न अपेक्षाएँ
न आकांक्षाएँ
न घात-प्रतिघात
न अपने न पराए
बस एकांत
बस सागर की विशालता
और इस एकांत में अहसास
अपना
अपने अस्तित्व का
और प्रकृति का।
.......................................
*६.६.०९ , सैंटा बारबरा , कैलीफोर्निया
Wednesday, 10 June 2009
बस इतनी -सा अस्तित्व है / अशोक लव
Tuesday, 9 June 2009
नाटककार हबीब तनवीर नहीं रहे : श्रद्धांजलि
मशहूर रंगकर्मी हबीब तनवीर का भोपाल में निधन
हो गया है। 85 वर्षीय हबीब काफी समय से बीमार चल रहे थे . रंगमंच की दुनिया पर एक अमिट छाप छोड़ने वाले श्री हबीब तीन हफ्ते से बीमार थे। उन्हें पहले हजेला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें नैशनल अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने जब आखिरी सांस ली तब उनकी बेटी नगीन उनके पास मौजूद थीं। पहले उन्हें सांस लेने में कुछ तकलीफ हो रही थी और इसके इलाज के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। बाद में उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। एक सितंबर 1923 को हबीब का जन्म रायपुर में हुआ था।
श्री हबीब ने पत्रकारिता से अपने करिअर की शुरुआत की। बाद में उन्होंने रंगमंच की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने रंगमंच को' जिन्ने लाहौर नहीं वेख्या , ओ जम्या नहीं' और बाजार जैसे कई कालजयी नाटक दिए। इसके अलावा हबीब ने आगरा बाजार , चरनदास चोर जैसे कई मशहूर नाटक लिखे | उन्होने कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया। हाल ही में उन्होंने सुभाष घई की ' ब्लैक ऐंड वाइट ' फिल्म में भी ऐक्टिंग की थी। हबीब तनवीर को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
*हबीब तनवीर जी को विनम्र श्रद्धांजलि !
श्री हबीब ने पत्रकारिता से अपने करिअर की शुरुआत की। बाद में उन्होंने रंगमंच की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने रंगमंच को' जिन्ने लाहौर नहीं वेख्या , ओ जम्या नहीं' और बाजार जैसे कई कालजयी नाटक दिए। इसके अलावा हबीब ने आगरा बाजार , चरनदास चोर जैसे कई मशहूर नाटक लिखे | उन्होने कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया। हाल ही में उन्होंने सुभाष घई की ' ब्लैक ऐंड वाइट ' फिल्म में भी ऐक्टिंग की थी। हबीब तनवीर को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
*हबीब तनवीर जी को विनम्र श्रद्धांजलि !
कविवर ओम प्रकाश आदित्य .नीरज पुरी और लाड़ सिंह गुर्जर को श्रद्धांजलि
भोपाल से लगभग 10 किलोमीटर दूर सूखी सेवनिया के नजदीक सोमवार तड़के एक सड़क दुर्घटना में तीन जाने-माने कवियों ओमप्रकाश आदित्य,
लाड़सिंह गुर्जर तथा नीरज पुरी की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य कवियों सहित तीन लोग घायल हो गए।
एसपी जयदीप प्रसाद ने को बताया कि सभी कवि रविवार रात राजधानी के निकट स्थित विदिशा में बेतवा उत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेकर लौट रहे थे। इसी दौरान सूखी सेवनिया के निकट संभवत: ड्राइवर को नींद आ गई और गाड़ी किसी अज्ञात वाहन से टकरा गई, जिससे ओमप्रकाश आदित्य और लाड़सिंह गुर्जर की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि नीरज पुरी ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में जानी बैरागी एवं ओम व्यास नाम के कवियों सहित तीन लोग घायल हो गए। उन्हें भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीन दिवसीय बेतवा महोत्सव का रविवार को अंतिम दिन था और इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन रात लगभग दस बजे शुरु हुआ जो सुबह साढे़ तीन बजे के आसपास समाप्त हुआ।
ये सभी कवि एक इनोवा में सवार होकर सुबह चार बजे के लगभग भोपाल के लिये रवाना हुए। प्रसाद ने बताया कि कवियों की इनोवा के पीछे और दो वाहन भी आ रहे थे, जिन्होंने इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस सभी को तुरंत अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने ओमप्रकाश आदित्य, लाड़सिंह गुर्जर और नीरज पुरी को मृत घोषित कर दिया।
कवियों को सुमंगलम ,दिल्ली साहित्य समाज , न्यू ऑब्ज़र्वर पोस्ट , सृजन का सहयोग , मित्र संगम आदि संस्थाओं की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि !
घायल कवियों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की गई.
एसपी जयदीप प्रसाद ने को बताया कि सभी कवि रविवार रात राजधानी के निकट स्थित विदिशा में बेतवा उत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेकर लौट रहे थे। इसी दौरान सूखी सेवनिया के निकट संभवत: ड्राइवर को नींद आ गई और गाड़ी किसी अज्ञात वाहन से टकरा गई, जिससे ओमप्रकाश आदित्य और लाड़सिंह गुर्जर की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि नीरज पुरी ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में जानी बैरागी एवं ओम व्यास नाम के कवियों सहित तीन लोग घायल हो गए। उन्हें भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीन दिवसीय बेतवा महोत्सव का रविवार को अंतिम दिन था और इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन रात लगभग दस बजे शुरु हुआ जो सुबह साढे़ तीन बजे के आसपास समाप्त हुआ।
ये सभी कवि एक इनोवा में सवार होकर सुबह चार बजे के लगभग भोपाल के लिये रवाना हुए। प्रसाद ने बताया कि कवियों की इनोवा के पीछे और दो वाहन भी आ रहे थे, जिन्होंने इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस सभी को तुरंत अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने ओमप्रकाश आदित्य, लाड़सिंह गुर्जर और नीरज पुरी को मृत घोषित कर दिया।
कवियों को सुमंगलम ,दिल्ली साहित्य समाज , न्यू ऑब्ज़र्वर पोस्ट , सृजन का सहयोग , मित्र संगम आदि संस्थाओं की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि !
घायल कवियों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की गई.
Thursday, 4 June 2009
सी वर्ल्ड : सैन डियेगो :कैलीफोर्निया
यहाँ ह्वेल , डोल्फिन , सील मछलियों के शो आनंदित कर देने वाले थे। कुत्तों,बिल्लियों ,कबूतरों,सूअरों और तोतों के ट्रेनर उनसे अपनी इच्छानुसार करतब दिखलाते हैं . एक्वेरियम और अन्य स्थान भी विश्व भर के पर्यटकों को आकर्षित कराते हैं । दिन भर घूमते-घूमते थकान होना स्वाभाविक था। लौटते हुए मार्ग में आर्टेशिया नगर में भारतीयों की दुकानों को देखा तो मन प्रसन्न हो गया।' तिरुपति धाम ' रेस्तरां में डोसों का परिवारजन के साथ आनंद लिया.
Sunday, 31 May 2009
लहरो कुछ तो कहो / अशोक लव
पाँवों के नीचे आकर
लौट जाती हैं लहरें
नहीं रुकती हैं पल भर के लिए
कितनी उत्सुकता से रहती है प्रतीक्षा ।
दूर से हिचकोले खाती लहर को आते देखकर
उससे बतियाना चाहता है मन
बहुत कुछ पूछना चाहता है मन
-उसके संसार की बातें
-तरह - तरह के रंग बदलते समुद्र की बातें
- ऐसे समुद्र के संग जीवन बिताने की बातें
लहरें हैं कि बस आती हैं
और झट से लौट जाती हैं ।
वह जिस तेज़ी से आती हैं
आभास होता है
आकर बैठेंगी
हाल-चाल बताएँगी
हाल-चाल पूछेंगी
मिलकर बाँटेंगे अपने - अपने अनुभव।
कितना अच्छा लगता है जब
कोई पास आकर बैठता है
अपनत्व का अहसास
अंतर्मन का स्पर्श करता चला जाता है ।
किसी के पास कहाँ है समय
पास आकर बैठने का,
बतियाने का
पूछने -बताने का ।
लहरों के पास भी नहीं है समय
तो फिर क्यों भागती चली आती हैं
क्यों करती हैं मन में अंकुरित
आशाएँ ?
संभवतः
उन्हें आशाओं की टूटन की
अनुभूति नहीं है।
.............................................................
* थाउजेंड ओक्ज़ , कैलीफोर्निया 2 जून 2009
*सर्वाधिकार सुरक्षित
हवाओं की तलाश
सामने पहाड़ है
दिन-रात यूँ ही खड़ा ।
मौसम के साथ रंग बदल लेता है
कभी हरे -भरे पेड़ों की हरियाली ओढ़ लेता है
और कभी धुंध भरे बादलों के पीछे से झांकता है।
धूप खिलती है तो उससे छनकर आती हैं गरम हवाएँ,
और धुंध के पीछे से
शीतल हवाएँ आकर भिगो देती हैं .
हवाओं के संग कितनी - कितनी यादें
गरम-गरम यादें
मन को छू जाती हैं ।
बहुत दूर आ जाने के पश्चात्
इन हवाओं की तलाश रहती है ।
.......................................................
*थाउजेंड ओ़क्स , कैलीफोर्निया
Sunday, 24 May 2009
लॉस एंजल्स : 23 मई 2009
दिल्ली में मई की ४४-४५ डिग्री की गरमी के मध्य जिंदगी बिता दी। यहाँ कैलीफोर्निया के 'थाऊजेंड ओक्ज़ ' नगर में मई महीने में कंपाती सर्दी का आनंद अलग ही था। फाउंटेन की भाप ने बिटिया के द्वारा लिए फोटोग्राफ पर धुंध की परत ही बिछा दी है।
Saturday, 23 May 2009
चाणक्य ने ठीक कहा है
धर्म तत्परता मुखे मधुरता दाने समुत्साहता
मित्रे अ वंचकता गुरौ विनयतास चितेअपी गंभीरता
आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञानता
रूपे सुन्दरता शिवे भजनता सत्हत्रेव संदृश्यते ।
चाणक्य ने सज्जन व्यक्ति के गुणों के सम्बन्ध में कहा है कि वह धार्मिक कार्यों में संलग्न रहता है। वह मधुर बोलता है । वह उत्साहपूर्वक दान देता है। वह मित्रों के प्रति छल-कपट का भाव नहीं रखता । वह गंभीर होता है। उसका आचरण शुद्ध होता है। वह साहित्य का आनंद लेने वाले गुणों से युक्त होता है.वह शास्त्रों का ज्ञाता होता है। उसका रूप सुंदर होता है। वह भगवान शिव का स्मरण करने वाला होता है। वह सत्य का साक्षात् रूप होता है.
*पुस्तक- चाणक्य नीति , संपादक- अशोक लव
मित्रे अ वंचकता गुरौ विनयतास चितेअपी गंभीरता
आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञानता
रूपे सुन्दरता शिवे भजनता सत्हत्रेव संदृश्यते ।
चाणक्य ने सज्जन व्यक्ति के गुणों के सम्बन्ध में कहा है कि वह धार्मिक कार्यों में संलग्न रहता है। वह मधुर बोलता है । वह उत्साहपूर्वक दान देता है। वह मित्रों के प्रति छल-कपट का भाव नहीं रखता । वह गंभीर होता है। उसका आचरण शुद्ध होता है। वह साहित्य का आनंद लेने वाले गुणों से युक्त होता है.वह शास्त्रों का ज्ञाता होता है। उसका रूप सुंदर होता है। वह भगवान शिव का स्मरण करने वाला होता है। वह सत्य का साक्षात् रूप होता है.
*पुस्तक- चाणक्य नीति , संपादक- अशोक लव
Wednesday, 20 May 2009
ओज के कवि मित्रवर मनोहर लाल रत्नम को श्रद्धांजलि
स्वर्गीय मनोहर लाल रत्नम के निधन की सूचना आरिफ जमाल ने ईमेल से दी। स्तब्ध रह गया। अमेरिका आने से पूर्व ' खिड़कियों पर टंगे लोग ' लघुकथा - संग्रह के प्रूफ़ लेकर वे मेरे कार्यालय आए थे। छः मई की फ्लाईट थी। उससे पूर्व पुस्तक के अन्तिम प्रूफ़ पढ़ लेने आवश्यक थे । उनका पुत्र अमित कोम्पोसिंग कर रहा था।
उनके साथ लगभग एक घंटे तक बातें हुईं । स्वस्थ लग रहे थे। कहने लगे बुखार रहता है। जांच करवाता रहता हूँ , कुछ नहीं निकलता ।
वे हास्य और ओज के कवि थे। उनका जीवन संघर्षमय रहा।
पत्नी की मृत्यु के पश्चात् वे टूट से गए थे।
वे मित्रता निभाना जानते थे। श्री श्रवण राही की मृत्यु के पश्चात् उन्होंने उनकी स्मृति में आयोजन किए। हमारा संपर्क लगभग ३० वर्ष का था। 'दिल्ली साहित्य समाज ' संस्था की स्थापना करके उन्होंने और भाई अशोक वर्मा ने अनेक साहित्यिक आयोजन किए। दिल्ली साहित्य समाज के आयोजनों ने दिल्ली भर में धूम मचा रखी थी। हमने अनेक आयोजनों में भाग लिया था।
पिछले महीने ही उन्हें ; विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ ' ने ' विद्यावाचस्पति ' की उपाधि से अलंकृत किया था। हमने उन्हें फ़ोन पर बधाई दी थी।
ज़मीन से जुड़े रत्नम जी विनम्र स्वभाव के कवि थे। हिन्दी अकादमी दिल्ली की ओर से आयोजित ' लाल किले ' के कवि सम्मेलनों में उन्होंने भाग लिया था।
आज ही उनके पुत्र से फोन पर बात की है। सांत्वना दी है।
श्री मनोहर लाल रत्नम जी को विनम्र श्रधांजलि !
उनके साथ लगभग एक घंटे तक बातें हुईं । स्वस्थ लग रहे थे। कहने लगे बुखार रहता है। जांच करवाता रहता हूँ , कुछ नहीं निकलता ।
वे हास्य और ओज के कवि थे। उनका जीवन संघर्षमय रहा।
पत्नी की मृत्यु के पश्चात् वे टूट से गए थे।
वे मित्रता निभाना जानते थे। श्री श्रवण राही की मृत्यु के पश्चात् उन्होंने उनकी स्मृति में आयोजन किए। हमारा संपर्क लगभग ३० वर्ष का था। 'दिल्ली साहित्य समाज ' संस्था की स्थापना करके उन्होंने और भाई अशोक वर्मा ने अनेक साहित्यिक आयोजन किए। दिल्ली साहित्य समाज के आयोजनों ने दिल्ली भर में धूम मचा रखी थी। हमने अनेक आयोजनों में भाग लिया था।
पिछले महीने ही उन्हें ; विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ ' ने ' विद्यावाचस्पति ' की उपाधि से अलंकृत किया था। हमने उन्हें फ़ोन पर बधाई दी थी।
ज़मीन से जुड़े रत्नम जी विनम्र स्वभाव के कवि थे। हिन्दी अकादमी दिल्ली की ओर से आयोजित ' लाल किले ' के कवि सम्मेलनों में उन्होंने भाग लिया था।
आज ही उनके पुत्र से फोन पर बात की है। सांत्वना दी है।
श्री मनोहर लाल रत्नम जी को विनम्र श्रधांजलि !
Monday, 18 May 2009
Wednesday, 13 May 2009
अशोक लव : सैंटा मोनिका बीच : कैलिफोर्निया
फोटोग्राफ्स-
१.बिटिया रेत पर पैरों के चिह्न छोड़कर लहरों का आनंद लेते हुए।
२ समुद्र किनारे परिवार के साथ कॉफ़ी ।
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' खिड़कियों पर टंगे लोग ' लघुकथा संग्रह का प्रकाशन जून २००९ में हुआ है। इसमें डॉ रामकुमार घोटड़, डॉ नीना छिब्बर , आर के मोहन ,सुषमा भंडारी ,सत्य प्रकाश भारद्वाज,शोभा रस्तोगी शोभा और मेरी लघुकथाएँ हैं । प्रत्येक लघुकथाकार की दस-दस लघुकथाएँ संकलित की हैं । 

