Saturday, 22 November, 2008

झिलमिलाती रोशनी / * अशोक लव

मई की गरमाती रात में
युकिलिप्ट्स के लंबे वृक्षों पर
निस्पंद पत्ते
मौन हैं।
शहर में छाया है घुप्प अँधेरा
बहुमंजिले भवन की छत से
दूर दिख रही है टिमटिमाती
रोशनी की लकीर।
उदासियों के सागर में
झीनी - झीनी झिलमिलाती
तुम्हारी देह के समान
मन में उतार जाती है
टिमटिमाती रोशनी की लकीर।
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पुस्तक - लडकियां छूना चाहती हैं आसमान ( प्रेम खंड )
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