Saturday 15 November 2008

लहरों के कामना दीप / * अशोक लव



लहरों को सौंप दिया है कामना - दीप
जहाँ चाहें ले जाएँ
उन्हीं पर आश्रित है अब तो
कामना - दीप का अस्तित्व।
हथेलियों में रखकर सौंपा था
लहरों को कामना - दीप
बहाकर ले जाने के लिए अपने संग
मंद-मंद हिचकोले खाता
बढ़ता जाता है लहरों के संग ।
कामना - दीप का भविष्य होता है
लहरों के हाथ
ज़रा - सा प्रवाह तेज़ होते ही
डोलने लगता है
और अंततः समां जाता है लहरों में।
कामना-दीप -सा समां जाना चाहता हूँ
सदा-सदा के लिए
तुम्हारे हृदय की स्नेहिल लहरों में ।
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* पुस्तक - " लडकियां छूना चाहती हैं आसमान " ( प्रेम खंड )

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