Monday 10 November 2008

तुम / * अशोक लव


तुम
ज्यों
अन्तिम पहर का स्वप्न
ज्यों
कमल पंखुडी पर तुहिन - कण
ज्यों
वर्षा धुले आकाश पर इन्द्रधनुष
ज्यों
तितलियों के पंखों पर अंकित गीत
ज्यों
जल-तरंगो पर रश्मियों की अठखेलियाँ
ज्यों
मानसरोवर में उतरना हंसों का
ज्यों
गंगा का भागीरथ हेतु अवतरण
ज्यों
शुष्क चट्टानों पर रुई के फाहों सा हिमपात
ज्यों
भोज - पत्रों पर अंकित ऋचाएं
ज्यों
साधक मन में आलोकित दिव्य - प्रकाश।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
* पुस्तक - अनुभूतियों की आहटें

No comments: